हिंदू एकता मंच कार्यक्रम में माइक छीने जाने का वीडियो वायरल, सामाजिक प्रतिनिधित्व पर उठे सवाल
मुरैना। जिला मुरैना के ग्राम पीपरखेड़ा में आयोजित एक हिंदू एकता मंच कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में दावा किया जा रहा है कि पुलिस विभाग में चयनित रविन्द्र सिंह गुर्जर, जिन्हें ओबीसी वर्ग से बताया जा रहा है, जब मंच से अपनी बात रखने लगे तो उनका माइक हाथ से ले लिया गया।
घटना के बाद स्थानीय स्तर पर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। कुछ लोगों का आरोप है कि कार्यक्रम में सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर असंतुलन दिखाई दिया, जबकि अन्य लोग इसे मंच संचालन की सामान्य व्यवस्था बता रहे हैं।
वायरल वीडियो के संदर्भ में यह भी कहा जा रहा है कि कार्यक्रम में अधिकांश प्रतिभागी गुर्जर समाज से थे और मंच पर सीमित संख्या में अन्य वर्गों के लोग मौजूद थे। हालांकि, इस संबंध में आयोजकों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ तेज
मामले ने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल पैदा कर दी है। विपक्षी दलों से जुड़े कुछ स्थानीय नेताओं ने इसे सामाजिक सम्मान और समान अवसर के मुद्दे से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं कि यदि मंच “हिंदू एकता” के नाम पर आयोजित था, तो किसी भी वर्ग के प्रतिनिधि को अपनी बात रखने से क्यों रोका गया।
वहीं कुछ अन्य राजनीतिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि वीडियो के आधार पर निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी और पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आना जरूरी है। उनका तर्क है कि कई बार कार्यक्रमों में समय-सीमा या अनुशासन के कारण भी हस्तक्षेप किया जाता है।
सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रिया
स्थानीय सामाजिक संगठनों ने भी मामले पर संतुलित जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि किसी भी वर्ग के साथ मंच पर भेदभाव हुआ है, तो यह एकता के उद्देश्य के विपरीत है। वहीं आयोजकों के समर्थक इसे अनावश्यक राजनीतिक रंग देने का आरोप लगा रहे हैं।
प्रशासन की स्थिति
अब तक प्रशासन की ओर से इस वीडियो को लेकर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है। हालांकि सोशल मीडिया पर बहस तेज है और लोग घटना की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
एकता के मंच पर प्रतिनिधित्व की बहस
यह प्रकरण एक बार फिर इस सवाल को सामने लाता है कि सामाजिक और धार्मिक एकता के नाम पर आयोजित कार्यक्रमों में सभी वर्गों को समान अवसर और सम्मान मिलना कितना जरूरी है। उत्तर प्रदेश और आसपास के राज्यों की राजनीति में सामाजिक समीकरण पहले से ही संवेदनशील मुद्दा रहे हैं। ऐसे में किसी भी घटना का व्यापक राजनीतिक अर्थ निकाला जाना स्वाभाविक है।
फिलहाल वायरल वीडियो चर्चा का विषय बना हुआ है। वास्तविक स्थिति और आयोजकों का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी।



