सोना-चांदी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर, सुरक्षित निवेश की ओर बढ़े लोग

MCX से COMEX तक उछाल, वैश्विक संकेतों ने बढ़ाई चमक
भारतीय सर्राफा बाजार में शुक्रवार का दिन ऐतिहासिक रहा। सोने और चांदी की कीमतों ने पुराने सभी रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिए। कमजोर होते अमेरिकी डॉलर, फेडरल रिजर्व की संभावित ब्याज दर कटौती और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच निवेशकों ने सुरक्षित निवेश (सेफ हेवन) की ओर रुख किया, जिसका सीधा फायदा कीमती धातुओं को मिला।
MCX पर चांदी की जबरदस्त छलांग
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी ने निवेशकों को चौंका दिया। मार्च वायदा अनुबंध में चांदी 12,638 रुपये की तेज उछाल के साथ 3,39,927 रुपये प्रति किलोग्राम के नए शिखर पर पहुंच गई। इससे पहले बुधवार को ही यह 3.35 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर पर पहुंची थी, लेकिन शुक्रवार को उसने वह रिकॉर्ड भी तोड़ दिया।
विश्लेषकों का कहना है कि चांदी में यह तेजी केवल घरेलू मांग का परिणाम नहीं, बल्कि वैश्विक बाजारों में आए उछाल का असर है। औद्योगिक उपयोग और निवेश मांग—दोनों ने मिलकर कीमतों को ऊपर धकेला है।
सोने की चमक भी ऐतिहासिक
सोना भी लगातार पांचवें कारोबारी दिन तेजी के साथ बंद हुआ। फरवरी वायदा अनुबंध 2,885 रुपये चढ़कर 1,59,226 रुपये प्रति 10 ग्राम के ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गया। गुरुवार को यही अनुबंध 1,56,341 रुपये पर बंद हुआ था।
बाजार जानकारों का मानना है कि निवेशक फिलहाल जोखिम से बचाव की रणनीति अपना रहे हैं और सोने को सुरक्षित ठिकाने के रूप में देख रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी हलचल
वैश्विक स्तर पर भी कीमतों में बड़ी तेजी दर्ज की गई। COMEX पर चांदी पहली बार 99 डॉलर प्रति औंस के पार निकल गई, जबकि सोना 1.15 प्रतिशत की बढ़त के साथ 4,970 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया।
अंतरराष्ट्रीय संकेतों का सीधा असर भारतीय बाजारों पर दिखाई दे रहा है। डॉलर की कमजोरी से सोने-चांदी की कीमतें आमतौर पर मजबूत होती हैं, क्योंकि इनकी कीमत डॉलर में तय होती है।
तेजी के पीछे क्या कारण?
1. फेडरल रिजर्व की नीति:
अमेरिका में ब्याज दरों में संभावित कटौती की उम्मीद ने डॉलर को दबाव में डाला है। जब ब्याज दरें कम होती हैं, तो निवेशक कम रिटर्न वाले डॉलर एसेट्स से निकलकर सोने-चांदी जैसे विकल्पों की ओर रुख करते हैं।
2. भू-राजनीतिक तनाव:
दुनिया के विभिन्न हिस्सों में जारी तनाव और अनिश्चितता के माहौल में निवेशक शेयर बाजार की बजाय सुरक्षित परिसंपत्तियों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
3. मजबूत निवेश मांग:
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF) और फिजिकल डिमांड दोनों में वृद्धि देखने को मिल रही है।
ऑगमोंट की रिसर्च हेड रेनिशा चैनानी के अनुसार, “मार्च 2020 के बाद से यह सोने-चांदी के लिए सबसे बेहतर दौरों में से एक है। वैश्विक अनिश्चितता ने कीमती धातुओं को मजबूती दी है।”
वहीं आशिका ग्रुप के सीबीओ राहुल गुप्ता का कहना है, “एमसीएक्स पर सोने की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल वैश्विक जोखिम और सकारात्मक निवेश माहौल का परिणाम है। निवेशक सुरक्षित और स्थिर विकल्प तलाश रहे हैं।”
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि फेडरल रिजर्व वास्तव में दरों में कटौती करता है और वैश्विक तनाव बरकरार रहता है, तो सोने-चांदी में और मजबूती आ सकती है। हालांकि ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
फिलहाल इतना तय है कि कीमती धातुओं की यह चमक बाजार में चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन चुकी है, और निवेशकों की नजर अब आने वाली वैश्विक आर्थिक घोषणाओं पर टिकी है।
