महोबा में बसपा ने संगठन में किया बड़ा बदलाव, गंगादीन अहिरवार को फिर सौंपी कमान

राजेंद्र कुशवाहा बने चित्रकूट मंडल प्रभारी, 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर रणनीतिक फेरबदल
महोबा। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने आगामी 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए महोबा जिले के संगठन में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। पार्टी नेतृत्व ने गंगादीन अहिरवार को पुनः जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंप दी है, जबकि पूर्व जिलाध्यक्ष राजेंद्र कुशवाहा को चित्रकूट मंडल का प्रभारी नियुक्त किया गया है।
यह बदलाव संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और सामाजिक समीकरणों को संतुलित करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, बसपा नेतृत्व 2027 के चुनाव को लेकर अभी से सक्रिय मोड में है और जिलों में अनुभवी व जमीनी पकड़ रखने वाले नेताओं को जिम्मेदारी दी जा रही है।

संगठन सुदृढ़ीकरण पर फोकस
गंगादीन अहिरवार को दोबारा कमान सौंपना इस बात का संकेत है कि पार्टी दलित समाज और परंपरागत वोट बैंक को फिर से मजबूती से संगठित करने की दिशा में काम कर रही है। अहिरवार समाज में उनकी सक्रियता और पूर्व में संगठनात्मक अनुभव को देखते हुए उन्हें यह जिम्मेदारी दी गई है।
वहीं, राजेंद्र कुशवाहा को हटाने के बजाय मंडल स्तर की जिम्मेदारी देना पार्टी के भीतर संतुलन बनाए रखने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। चित्रकूट मंडल का प्रभारी बनाए जाने से यह स्पष्ट है कि पार्टी उन्हें व्यापक क्षेत्र में संगठन विस्तार का दायित्व सौंपना चाहती है।

2027 को लेकर सक्रिय हुई बसपा
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। बसपा भी अपने परंपरागत सामाजिक आधार—दलित, पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग—को एकजुट करने की दिशा में संगठनात्मक बदलाव कर रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बुंदेलखंड क्षेत्र में बसपा अपने पुराने जनाधार को पुनर्जीवित करने के प्रयास में है। महोबा और चित्रकूट जैसे जिलों में संगठनात्मक मजबूती चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकती है।
कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा
जिलाध्यक्ष पद पर बदलाव के बाद कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा देखने को मिल रही है। पार्टी की स्थानीय इकाइयों में बैठकें शुरू हो गई हैं और बूथ स्तर तक पुनर्गठन की प्रक्रिया तेज की जा रही है।
कुल मिलाकर, यह फेरबदल बसपा की दीर्घकालिक चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत 2027 के लिए मजबूत संगठनात्मक ढांचा खड़ा करने की कोशिश की जा रही है। आने वाले दिनों में अन्य जिलों में भी इसी प्रकार के बदलाव देखने को मिल सकते हैं।



