बड़ी खबर: जनगणना-2027 के चलते टल सकते हैं यूपी पंचायत चुनाव

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित पंचायत चुनावों को लेकर बड़ी जानकारी सामने आ रही है। सूत्रों के अनुसार अप्रैल-मई में पंचायत चुनाव कराए जाने की संभावना बेहद कम दिखाई दे रही है। चर्चा है कि ये चुनाव अब 2027 के विधानसभा चुनाव के बाद ही आयोजित किए जा सकते हैं। हालांकि इस संबंध में अभी तक सरकार या राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन प्रशासनिक हलकों में चल रही तैयारियों और परिस्थितियों को देखते हुए ऐसे संकेत मिल रहे हैं।
दरअसल, भारत के रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय द्वारा 22 जनवरी को जनगणना-2027 का विस्तृत कार्यक्रम जारी किया गया है। यह देश की 16वीं जनगणना होगी, जो पूरी तरह डिजिटल माध्यम से संपन्न कराई जाएगी। कार्यक्रम के अनुसार 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 तक ‘हाउस लिस्टिंग’ का कार्य किया जाएगा, जबकि दूसरे चरण में 1 फरवरी से 28 फरवरी 2027 के बीच जनसंख्या की वास्तविक गणना होगी।
सूत्रों का कहना है कि जनगणना की तैयारियां व्यापक स्तर पर की जा रही हैं और इसमें बड़ी संख्या में प्रशासनिक व शिक्षकीय कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी। उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में अनुमानित रूप से 50 से 60 हजार शिक्षक, शिक्षा मित्र, लेखपाल तथा अन्य विभागीय कर्मचारियों की ड्यूटी हाउस लिस्टिंग कार्य में लगाई जा सकती है। इसके अतिरिक्त जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी, उपजिलाधिकारी (एसडीएम), तहसीलदार, नगर आयुक्त, अधिशासी अधिकारी और विकासखंड अधिकारी स्तर तक के प्रशासनिक अधिकारियों को भी जनगणना कार्य में प्रत्यक्ष रूप से जोड़ा जाएगा।
ऐसी स्थिति में पंचायत चुनावों के लिए आवश्यक मानव संसाधन उपलब्ध कराना प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। पंचायत चुनाव जैसे व्यापक और बहु-स्तरीय निर्वाचन में बड़ी संख्या में कर्मचारियों की तैनाती, प्रशिक्षण और सुरक्षा व्यवस्था की आवश्यकता होती है। यदि वही कर्मचारी जनगणना कार्य में व्यस्त रहेंगे तो चुनावी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का भी मानना है कि सरकार और प्रमुख राजनीतिक दलों की ओर से पंचायत चुनाव को लेकर अब तक जिस प्रकार की सक्रियता अपेक्षित थी, वह दिखाई नहीं दे रही है। न तो चुनावी तैयारियों को लेकर कोई ठोस समय-सीमा सामने आई है और न ही निर्वाचन संबंधी प्रशासनिक गतिविधियां तेज हुई हैं। इससे भी संकेत मिल रहे हैं कि पंचायत चुनावों की समय-सारिणी में बदलाव संभव है।
हालांकि राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से अभी तक कोई औपचारिक वक्तव्य जारी नहीं किया गया है। आधिकारिक घोषणा के अभाव में स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं कही जा सकती। लेकिन सूत्रों के हवाले से मिल रही जानकारी प्रशासनिक प्राथमिकताओं में जनगणना को शीर्ष स्थान दिए जाने की ओर इशारा करती है।
गौरतलब है कि पंचायत चुनाव प्रदेश की ग्रामीण राजनीति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत स्तर पर होने वाले ये चुनाव जमीनी राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित करते हैं। ऐसे में यदि चुनाव 2027 के विधानसभा चुनाव के बाद कराए जाते हैं तो इसका राजनीतिक प्रभाव भी व्यापक हो सकता है।
फिलहाल सभी की निगाहें राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं। जब तक औपचारिक कार्यक्रम जारी नहीं होता, तब तक पंचायत चुनावों की तिथि को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रहेगी।



