आबादी के बीच खुले शराब ठेके को लेकर महिलाओं व ग्रामीणों में आक्रोश, डीएम को सौंपा ज्ञापन
महोबा।
जिले के कुलपहाड़ तहसील अंतर्गत बरेंडा बुजुर्ग गांव में आबादी के बीच खुले शराब ठेके को लेकर महिलाओं और ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। मुख्य मार्ग पर संचालित ठेके के कारण महिलाओं, छात्राओं और राहगीरों को लगातार असहज परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। समस्या से परेशान महिलाओं ने बुधवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा और ठेका तत्काल आबादी से दूर शिफ्ट किए जाने की मांग की।
ग्रामीण महिलाओं का आरोप है कि गांव के मुख्य रास्ते पर स्थित शराब ठेके पर सुबह से ही शराबियों और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है। इसी मार्ग से स्कूल जाने वाली छात्राएं और घरेलू कार्यों के लिए महिलाएं रोजाना गुजरती हैं, लेकिन शराबियों द्वारा छींटाकशी, अभद्र टिप्पणियां और अशोभनीय हरकतें आम हो चुकी हैं। महिलाओं का कहना है कि कई बार शराबी अर्धनग्न अवस्था में सड़क पर खड़े रहते हैं, जिससे बेटियों और महिलाओं की सुरक्षा पर गंभीर खतरा बना हुआ है।
प्रदर्शन में शामिल गोमती, साधना, जितेंद्र और तुलसी सहित अन्य महिलाओं ने बताया कि हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि मनचलों के डर से छात्राओं ने स्कूल जाना तक कम कर दिया है। इससे न केवल बेटियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, बल्कि पूरे गांव में भय का माहौल बना हुआ है।
महिलाओं और ग्रामीणों ने ज्ञापन में स्पष्ट किया कि वे इस समस्या को लेकर पहले भी तहसील और संबंधित अधिकारियों से कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। किसी ठोस कार्रवाई के अभाव में आज उन्हें जिला मुख्यालय तक आना पड़ा।
ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब सरकार ‘बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ’ जैसे अभियान चला रही है, तो फिर गांव के मुख्य मार्ग और आबादी के बीच शराब का ठेका खोलकर महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा से समझौता क्यों किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही शराब ठेका आबादी से दूर किसी निर्जन स्थान पर स्थानांतरित नहीं किया गया, तो गांव की महिलाएं और ग्रामीण बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
अब सभी की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि महिलाओं और ग्रामीणों की इस वाजिब मांग पर कब तक ठोस कार्रवाई की जाती है।

