लखनऊ।
किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) से जुड़े बहुचर्चित मामले में पुलिस जांच के दौरान अहम खुलासे सामने आए हैं। लव जिहाद और बलात्कार के आरोपों में गिरफ्तार रमीजुद्दीन के जब्त किए गए लैपटॉप की प्राथमिक जांच में एक “जन्नत” नामक फोल्डर मिलने की जानकारी सामने आई है। पुलिस के अनुसार, इस फोल्डर में कथित तौर पर कई युवतियों से संबंधित विवरण और आपत्तिजनक डिजिटल सामग्री पाई गई है।
जांच एजेंसियों का कहना है कि आरोपी ने पूछताछ से पहले अपने डिजिटल उपकरणों से कई चैट और फाइलें डिलीट कर दी थीं। इसके बावजूद तकनीकी साक्ष्यों को सुरक्षित रूप से पुनः प्राप्त करने के लिए पुलिस ने लैपटॉप को फोरेंसिक लैब भेज दिया है, जहां डिलीट किए गए डेटा को रिकवर करने का प्रयास किया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि फोरेंसिक रिपोर्ट से मामले में और ठोस साक्ष्य मिल सकते हैं।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरोपी के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) के विश्लेषण से कुछ ऐसे लोगों की पहचान हुई है, जो इस मामले में उसके सहयोगी हो सकते हैं। जांच टीम इन संदिग्ध संपर्कों की भूमिका की पुष्टि कर रही है और संकेत हैं कि जल्द ही कुछ और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
पूछताछ के दौरान आरोपी द्वारा बार-बार अपने माता-पिता को मामले से अलग और निर्दोष बताने का प्रयास किया गया है। पुलिस इस दावे की भी स्वतंत्र रूप से जांच कर रही है। वहीं, कथित धर्म परिवर्तन कराने वाले एक काजी की तलाश तेज कर दी गई है। पुलिस के अनुसार, संबंधित काजी ने करीब दो सप्ताह पहले एक समाचार चैनल/पत्रकार को इंटरव्यू दिया था, जिसके बाद से वह लापता बताया जा रहा है। उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।
जांच अधिकारियों को आशंका है कि यह मामला किसी बड़े संगठित नेटवर्क (नेक्सस) से जुड़ा हो सकता है। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं—डिजिटल साक्ष्य, वित्तीय लेन-देन, संपर्कों की कड़ी और कथित नेटवर्क—की गहनता से जांच की जा रही है।
फिलहाल, पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जांच जारी है और फोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई तथा विस्तृत खुलासे किए जाएंगे। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों से बचने और जांच पूरी होने तक आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है।

